'काश्मीर के प्रति पुस्तक' को अलग-अलग पेजेस में डिवाइड किया गया है होम पेज पर ही आप ये पाएँगे :-


काश्मीर के प्रति
काश्मीर के प्रति - कवि की कलम से
काश्मीर के प्रति - सम्पादकीय
कश्मीर के प्रति - पाठकों के पत्र
काश्मीर के प्रति - प्रथम सर्ग
काश्मीर के प्रति - द्वितीय सर्ग
काश्मीर के प्रति - तृतीय सर्ग
काश्मीर के प्रति - चतुर्थ सर्ग
काश्मीर के प्रति - पंचम सर्ग


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मंगलवार, 5 जुलाई 2011

कश्मीर के प्रति

ओ      हिंद    वीर  के  उच्च  भाल,किन्नरियों  के  पावन,  सुदेश |
तेरी  महिमा  का  अमित  गान ,कर  सकते  क्या  सारद  गणेश ||१||

सौन्दर्य  सलिल  सरवर  है  तू ,नर  नलिन  जहाँ  सर्वत्र  खिले |
मधुकरी  किन्नरी  वार  चुकी , मधु -रस  लेकर  मन  मुक्त  भले ||२||

पर्वत  पयस्विनी  पादप  गन , पुष्पावली  पावन  विविध  रंग |
आभूषित   कलित  मृदुल  मधु  मय , प्रकृति  वनिता  के  विविध  रंग ||३||

केसर  कल  कंज  विहारिण  हो , वर  प्रकृति  पद्मनी  वाम  बनी |
नर  की  क्या  गणना   है  जिस  पर , मोहित  होते  सुर  यक्ष  मुनि ||४||

तेरी  कल  कंज  कली  केसर , बादाम  दाम  सी  फुलवारी |
फल  फुल्ल -फुल  मधुमय  मेवा , निर्झर  प्रपात  हिममय  वारी ||५||

भारत  माता  का  तू  ललाट , पृथ्वी  का  नंदन  सा  कानन |
अथवा  तू  भारत  भामिनी  का , मंजुल  मयंक  सा  है  आनन ||६||

कुछ  तीव्र  त्वरित  गति  से  बहती , इठलाती  सी  इतराती  सी |
नव  वधु  वितस्ता  तव  हिय  पर , कल  कलिका  सी  कलपाती सी  ||७||

उसमें  कंजादिक  विविध  पुष्प , मानो  बहु  दीप  सुहाते  हैं |
अपने  प्रियतम  की  आरती  को , आरत  हर  वारे  जाते  हैं ||८||

तरनी  तटनी  शीतल  जल  में , जब  खोल  पाल  को  बहती  है  |
मनो  अलका  नगरी  नभ  में , पर  खोल  परी  बहु  उडती  हैं ||९||

त्वरिता  गति  से  वे  आ जा कर , इतराना  अमित  दिखाती  हैं  |
लहरों  से  लह  कर  सलिल  घाट , अनुपम  नव  नृत्य  दिखाती  हैं ||१०||

1 टिप्पणी:

  1. 'कश्मीर के प्रति' एक खंड काव्य के रूप में निबद्ध किया गया है | इस काव्य में पांच सर्गों में कश्मीर के सम्बन्ध में अपनी भावना व्यक्त की गयी है | जिसमे कश्मीर गौरव, १९४८-४९ का पाक-युद्ध , १९६५ का भारत-पाक रण, बंगलादेश का अनाचार एवं सन ७१ का पाक आक्रमण एवं भारत विजय का उल्लेख किया गया है |

    यह पुस्तक १९७२ में "गोपाल साहित्य सदन" द्वारा प्रकाशित की गयी थी | यहाँ इस पुस्तक के कुछ अंश पेश किये गए हैं | संपूर्ण पुस्तक इ-बुक के रूप में तैयार की जा रही है |

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सुधाकर जी द्वारा अर्जित सम्मान / पुरस्कार

*तत्कालीन वित्तमंत्री श्री मनमोहन सिंह द्वारा 'सेवा श्री' सम्मान
*साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा 'साहित्य वारिधि' सम्मान
*ब्रज साहित्य संगम द्वारा 'ब्रज विभूति' सम्मान
* माथुर चतुर्वेद केंद्रीय विद्यालय द्वारा 'कलांकर' सम्मान

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